जीवन के सब रंग लायी, देखो होली आई,
लगा के ये रंग क्यों न आज, हम फिर जी उठे,
खेल के ये रंगी होली क्यों न आज, हम फिर जी उठे,
रंगो के इस त्यौहार मे, सब रंगे हुए है,
हम भी रंगे हुए क्यों फिर, बेरंग से है,
ये रंग क्यों सबको दिखे, हमे न दिखे,
May 24, 2008
जीवन के सब रंग लायी…
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