ये कौन आया रेगिस्तान मे हरियाली सी छा गई,
उसकी कातिल अदाएँ मेरे दिल-ओ-दिमाग पे छा गई,
कही जोश-ऐ-जूनून मे कुछ कर न बैठु मैं,
ऐ दोस्त इश्क-ऐ-जूनून मे सब कुछ कर न बैठु मैं,
May 29, 2008
ये कौन आया रेगिस्तान मे…
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सुंदर कविता
Comment by आशीष कुमार 'अंशु' — May 30, 2008 @ 11:03 am