कल फिर न सो सका तेरी याद में,
आज फिर न जाग सका तेरी याद से,
इन अश्को ने याद किया हर पल,
एक पल भी न रुके तेरी याद में,
जागना चाहा एक पल तेरी याद से ,
सो गया अगले ही पल तेरी याद में,
छोड़ दिया है साथ अब पलकों ने,
बंद होंगी अब ये सिर्फ़ मेरी मौत पे,
सोया नही हूँ बरसो से एक पल भी मैं,
जागूँगा बरसो अब तो तेरी याद में,
July 1, 2008
कल फिर न सो सका तेरी याद में…
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आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा
इतना मानूस न हो ख़िल्वत-ए-ग़म से अपनी
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जायेगा
Comment by Desh Raj Sirswal — July 23, 2008 @ 2:35 pm